Sun. Jan 18th, 2026

खुल्लम खुल्ला जीवन

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*हमारा जीवन एक खुली* *किताब है…*

✍️२७६०

सुख दुख से भरा हमारा जीवन
एक खुली किताब की तरह चाहिए !

खूब हॅंसीए , खूब रोईये भी , खुलकर जीवन का आनंद लिजिए !

सुख कम और दुख जादा होता है जीवन में हमारे ,
फीर भी खुलकर जिये !

दोस्तों के साथ हॅंसिए , खेलिए !
खुद का जीवन मस्त आनंद से बिताईये !
मित्रों के साथ खूब और खुलकर गपशप किजिए !

फेसबुक , व्हाट्सअप , इंस्टाग्राम पर खुलकर बोलिए , लिखिए !
मन की भडास , मन का सारा सुखदुख हल्का किजिए !

दुनिया तो हॅंसती ही है !
अच्छा करेंगे , तो भी हॅंसती है , मौन रहेंगे तो भी हॅंसती है ,
दुनियादारी के पिछे मत भागीए !

जो अच्छा , नेक कार्य है वह कार्य किसीकी फिकीर करते बगैर आगे आगे बढाते रहिए !

खुली किताब की तरह हमारा जीवन मस्त रखिए !

जो मन में आये वह सबकुछ बिनधास्त बोलिए , लिखिए !
खूब दोस्त जमा किजिए !

सच्चा दोस्त अगर नहीं भी मिला तो ? ईश्वर से बोलिए !
उससे नाता जोडिए !

सभी पर सच्चा प्रेम किजिए !

प्रेम की कीमत नहीं रही तो ? सदा के लिये नाता तोड दिजिए !

फिर भी मस्त होकर बडे आनंद से सारा जीवन बिताते रहिए !

गाना गाईये , गुनगुनाते रहिए !
जीवन में सदैव चैतन्य की बहार लाते रहिए !

हमेशा छोटासा बच्चा बनकर एक आनंददायी जीवन जीते रहिए !

सनातन धर्म का भी कार्य निरंतर , नितदिन करते रहिए !
भला बूरा सबकुछ ईश्वर के चरणों में अर्पण करते रहिए !

मस्त अवलिया बनकर पूरा जीवन बडे आनंद से बिताते रहिए !

श्रीकृष्ण की तरह जीवनभर के लिये , झूमते गाते रहिए !

हो सके तो मुझसे भी सच्ची दोस्ती करते रहिए !

सुख हो या दुख, जीवन धूमधाम से बिताते रहिए !

खुल्लम खुल्ला रहिए !
फ्री माईंड रहिए !
टेंशन फ्री रहिए !
खुले दिल रहिए !

पशुपक्षीयों से प्रेम करिए !
ईश्वर से प्रेम करिए !
ईश्वर से , पशुपक्षीयों से खुलकर बाते करिए !

इससे तुम्हारा मन , मस्तिष्क भी हलका रहेगा !
दिल भी हलका रहेगा !

तुम्हारा आरोग्य भी उत्तम रहेगा !
तुम्हारी उमर भी बढेगी !

इसिका नाम जीवन है !
इसिका नाम आनंद है !

*जय श्रीकृष्ण*

*विनोदकुमार महाजन*

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