
*शिवस्वरोदय*
✍️ २७६५
*विनोदकुमार महाजन*
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सो अहम् सो अहम्
मैं वहीं हूं मैं वहीं हूं
अहम् ब्रम्हास्मी अहम् ब्रम्हास्मी
मैं ही ब्रम्ह हूं
मैं ही ब्रम्हांड हूं
संपूर्ण ब्रम्हांड ही मेरे अंदर है
शिवो हम् शिवो हम्
शिव के स्वर का उदय
आंखे बंद करके आज्ञाचक्र में स्थिर होना
आज्ञाचक्र में धीरे धीरे संपूर्ण ब्रम्हांड देखना
एक गहरी सांस लेना
पूरक कूंभक रेचक
कूंभक में ध्यान लगाईये
यही ध्यान है
यही समाधी है
यही शिव से मीलन है
यही शिवो हम् है
फिर धीरे धीरे मूलाधार चक्र में स्थिर होना
वहां की कुंडलीनी शक्ती से एकरूप हो जाना
इडा पिंगला शुषूम्ना को धीरे धीरे रीढ की हड्डीयों में से आज्ञाचक्र में फिर से स्थिर करना
यहीं पर है संपूर्ण ब्रम्ह ज्ञान का माध्यम
ब्रम्ह शक्तियों का भंडार
और फिर धीरे धीरे सहस्त्राकार तक पहुंच जाना
सहस्त्रकमल दल
ब्रम्हांडीय उर्जा का शक्तिशाली उर्जा का भंडार
यही है ईश्वरी शक्तियों से एकरूप होने का माध्यम
यही है ईश्वर स्वरूप होने का शक्तिशाली उर्जा का स्त्रोत
सो अहम् सो अहम्
शिवो हम् शिवो हम्
अहम् ब्रम्हास्मी अहम् ब्रम्हास्मी
तु भी ब्रम्ह मैं भी ब्रम्ह
पशुपक्षीयों में भी ब्रम्ह
तो भेद कहां रह गया
*शिवो हम् शिवो हम्*
यही है ईश्वर निर्मित वैदीक सत्य सनातन धर्म का असली उद्देश
सब में ईश्वर देखना
सब को ईश्वर बनाना
इसिलिए
*सत्य सनातन ही अंतिम* *सत्य है*
जागो विश्व मानव
*अंधियारा छोडो*
*प्रकाशमान बनो*
केवल और केवल सनातन ही पुर्णत्व सिखाता है
केवल सनातन ही मनुष्य को ईश्वर बनाता है
यही मानवी जीवन का और बहुमुल्य मानवी देह का ईश्वरी प्रायोजन है
सभी की चेतना जगाना
*ॐ नमः शिवाय*
*हर हर महादेव*
*जय महांकाल*
संपूर्ण विश्व पर भगवान का भगवा लहरायेंगे
भगवे का राज लायेंगे
धरती को सुंदर बनाएंगे
*विश्व स्वधर्म सुर्ये पाहो*
( संत ज्ञानेश्वर )
*हरी ॐ*
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