
*एडजेस्टमेंट*
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हमारा संपूर्ण जीवन
लगभग बचपन से लेकर बुढापे तक का जीवन का सफर हमेशा
*एडजेस्टमेंट* से चलता है और इसपर ही निर्भर रहता है !
हमारी जितनी उच्च कोटी की एडजेस्टमेंट होती है उतना हमारा जीवन आनंदी रहता है !
यह एक उच्च कोटी की कला है !
एडजेस्टमेंट !
समझौता !
समझदारी !
समजूतदारपणा !
हर एक को जीवन में जरूरी होता है !
वैसे तो हम पगपगपर हमेशा एडजेस्टमेंट करते रहते है !
किसी को मनचाही नौकरी नहीं मिलती है ! तो किसीको मनचाहा उद्योग व्यावसाय नहीं मिलता है !
किसीको मनचाहा जीवन साथी नहीं मिलता है !
समस्या और समस्याओं का बोझ हमारे सरपर हमेशा अनगिनत रहता है !
मगर हम हरपल एडजेस्टमेंट , समझौता करते रहते है !
पैसा नहीं है ?
एडजेस्टमेंट !
पैसा कम है ?
एडजैस्टमेंट !
हमारा पगार पुरता नहीं है ?
एडजेस्टमेंट !
पत्नी या पती हमेशा विनावजह किरकिर करते रहते है ?
एडजेस्टमेंट !
हमेशा मन के विरूद्ध अनेक घटनाएं हमारे जीवन में होती रहती है ?
एडजेस्टमेंट !
बाॅस तकलिफ देता है ?
एडजेस्टमेंट !
यही जीवन है !
और जीना इसिका नाम है !
इसिलिए जो समझौता , एडजेस्टमेंट सीख गया , वो जीना सीख गया !
अनेक बार दुखी मन से एडजेस्टमेंट तो करनी ही पडती है !
नितदिन संघर्षो से भरे जीवन में एडजेस्टमेंट का महत्व बहुत ही महत्वपूर्ण होता है !
इसिलिए हमेशा एडजेस्टमेंट करते रहिए !
जीवन को खुशहाल बनाते रहिए !
खुश रहेंगे !
मस्त रहेंगे !
हॅंसते खेलते जीवन का गुजारा करते रहेंगे !
*जय हरी विठ्ठल*
*विनोदकुमार महाजन*
