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Sun. Oct 11th, 2026

हर दिन मंदिर क्यों जाना चाहिए ?

हर दिन मंदिर में क्यों जाना चाहिए ?
✍️ २१५६

विनोदकुमार महाजन
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*मंदिर जाने के 36 ठोस वैज्ञानिक फ़ायदे…*

मंदिर में कदम रखते ही हमे ईश्वर का भक्ति के अलावा कई चौमुखी लाभ मिलते है जिनका विवरण नीचे की पंक्तियों मे किया गया है।

* मंदिर जाने हमारा सुबह ब्रह्म महुर्त में जगने का नियम बनता है और हम उठते ही अपने नित्य कर्म जैसे उषापान, शौच, दन्त धावन, स्नान आदि से निवृत हो जाते है।

* पास के मंदिर पैदल जाने से हमारा भ्रमण व्यायाम होता है, प्राणवायु मिलती है और उगते हुए सुर्य की दिव्य लालिमा का अवलोकन होता है।

* मंदिर के घंटी की 7 सेकंड की टन्कार पर ध्यान केन्द्रित होनें से हमारा मन सभी संसारिक विषमताओ से हट कर प्रभु के चरणों मे अर्पित हो जाता है।

* हम मंदिर में भगवान को अर्पित फूलों की खशबू से हमे स्वास्थ्य लाभ मिलता है और उत्साह वर्धन होता है।

* मंदिर में अर्पित भिन्न भिन्न फूलों के विविध रंगो से हमारे अन्तरमन को सकुन मिलता है।

* मंदिर में कपूर और अगरबत्ती की दिव्य सुगंध से हमारी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और नकारात्मकता समाप्त होती है। हाल ही में फैले स्वाइन फूल्यू के जैविक संक्रमण से बचने मे कपूर की अहम भूमिका की बहुत चर्चा हुई थी।

* मंदिर में अपने जीवन के उद्देश्यों को दोहराते हैं और ईश्वर से सफलता का आशिर्वाद माँगते हैं।

* सुबह उठते ही हम उस दिन की कार्य सुचीं लिखते है और उसे मंदिर ले कर जाते है। वहाँ उन सभी कार्य को पुरा करने हेतू कठोर परिश्रम का संकल्प लेते हैं।

* जब हम मंदिर में आरती और कीर्तन के दौरान ताली बजाते है तो हमे इस एक्यूप्रेशर से स्वास्थ्य लाभ मिलता है।

* आरती मे बजाये जाने वाली छोटी घंटी से हमारा पित्त दोष सन्तुलित होता है। शायद इसी कारण से गऊमाता के गले मे भी घंटी बाँधी जाती है क्योंकि ये सर्वमान्य है गाय मे पित्त ज्यादा होती है।

* आरती के दौरान चालीसा के जाप से हमारी वाणी मे दिव्यता आती है। ओम् के उच्चारण से हमारा चित एकाग्र होता है ।

* आरती के बाद शंख बजाया जाता जो श्रद्धालुओ के लिए बहुत सुखदायी और स्वास्थ्य वर्धक है।

* आरती के बाद हम भारत माता की, गंगा मैया की जय बोलते है जिससे हमारी देश भक्ति जागृत होती है।

* हर मंदिर मे आरती के बाद गो रक्षा और गौ हत्या बंद होने का संकल्प ज़रूर दोहराते है।

* आरती के बाद हम ज्योत पर अपना हाथ घुमा कर अग्नि स्पर्श करते है। इससे हमारी कोशिकाओं को दिव्य उषमता मिलती है और हमारे भीतर पल रहे सभी जीवाणु संक्रमण समाप्त हो जाते है।

* ज्योत पर फरने के उपरान्त हम अपनी ऊष्म हाथेलियो को आंखों से लगाते हैं। यह गर्माहट से हमारी आँखो के पीछे की सुक्षम रक्त वाहिकाओं को खोल देती है और उन में ज्यादा रक्त प्रवाहित होने लगता है जिससे हमारी आँखो कि ज्योति मे वृद्धि होती है।

* ज्योत पर हथेली रखना हमारे द्वारा हुई सभी भूल चूक के प्रायश्चित का भी प्रतीक है।

* आरती के बाद हम दण्डवत हो कर माथा धरती पर लगाते है. तो हमारा घमण्ड चूर चूर होकर धरती मे समाहित हो जाता है।

* मंदिर में भगवान के दर्शन के बाद हमें तुलसी, चरणामृत और प्रसाद मिलता है। चरणामृत एक दिव्य पेय प्रसाद होता है जिसे गाय के दुग्ध, दही, शहद, मिस्री, गंगाजल और तुलसी से बना कर विशेष धातु के बर्तन में रखा जाता है। आयुर्वेद के मुताबिक यह चरणामृत हमारे शरीर के तीनों दोषों को संतुलित रखता है।

* चरणामृत के साथ दी गई तुलसी हम बिना चबाए निगल लेते हैं जिससे हमारे सभी रोग ठीक हो जाते हैं।

* मंदिर में पूजा अर्चना के बाद जब हम भगवान की मूर्ति की परिक्रमा करते हैं। पुरे ब्रह्मांड की दैवीय उर्जा गर्भस्थान के शिखर पर विघ्यमान धातु के कलश से प्रवाहित हो कर ईश्वर की मूर्ति के नीचे दबाई गई धातु पिंड तक जाती है और धरती में समा जाती है। गर्भस्थान की प्ररिक्रमा के दौरान हमे इस ब्रह्मांडिय उर्जा से लाभ मिलता है।

* मंदिर की भूमि को सकारात्मक ऊर्जा का वाहक माना जाता है। यह ऊर्जा भक्तों में पैर के जरिए ही प्रवेश कर सकती है। इसलिए हम मंदिर के अंदर नंगे पांव जाते हैं।

* मंदिर से बाहर आते हुए फिर से घंटी बजा कर हम संसारिक ज़िम्मेदारियों मे वापिस आ जाते हैं।

* मंदिर में सूर्य को जल अर्पित करने से हम उसकी आलौकिक किरणों से लाभान्वित होते हैं।

* पीपल,बड़, बरगद को जल अर्पण करने से हमे वहाँ फैली ख़ास तरह की ऑक्सिजन मिलती है। ये सभी एक दिव्य वृक्ष है जो बहुत अघिक मात्रा में प्राणवायु को चारों और विसर्जित करते हैं। इसके पत्ते इतने संवेदनशील होते है कि वे रात्रि मे भी चंद्रमा की किरणों से आक्सिजन पैदा करते हैं।

* मंदिर में हम तुलसी के पौधे और केले के पेड़ को भी जल देकर तृप्ति होते है।

* मंदिर मे बाहर आकर हम वहाँ मौजूद ज़रूरतमंदों को दान पुण्य करते है जिससें हमारे मन मे शान्ति आती है।

* मंदिर के माध्यम हम अपनी कमाई का दशम सामाजिक कार्यो में लगाते है और समाज में समरसता और सौहार्द आता है।

* आजकल शहर मे घरो मे गो माता रखने का प्रवधान नही है पर हम मंदिर जा कर गो ग्रास देकर अपने संस्कारों को जारी रख सकते है।

* मंदिर नित दिन जाने से हमारा नये धार्मिक लोगों से परिचय होता है।

* मंदिर जाने से हमारी सामाजिक प्रतिष्ठा बढती है।

* मंदिर जाने से वहाँ के पुरोहित जी से आशिर्वाद मिलता है और हमें पंचांग आदि जैसी कई ज़रूरी सांस्कृतिक जानकारी मिलती है। पंचांग के श्रावण या पाठन से हमें अपनी धार्मिक ज़िम्मेदारियों का पालन करने में मदद मिलती है और हमारा कल्याण होता है।

* मंदिर में सभी वेद, पुराण, गीता, रामायण, महाभारत, आदि शास्त्र मौजूद होते हैं जिन्हें पढ़ कर हम अपना जीवन सफल कर सकते है।

हम सब प्रति दिन मंदिर जाने का संकल्प ले इससें हमारा समाज संगठित होगा संस्कृति की रक्षा होगी और हमारा प्यारा भारत पुन: विश्व गुरू बनेगा।

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