
*भारत के अच्छे लोग ?*
*विदेश जाना क्यों* *सोचते है…??*
✍️ २९३०
*विनोदकुमार महाजन*
❓⁉️❓⁉️
जी हाँ साथीयों
आज हम भारत के अच्छे लोगों के अंदर चल रहे विचारों के तुफानों को टटोलने की कोशिश करेंगे…
क्या सचमुच में भारत देश में ? सच्चे , अच्छे , प्रामाणिक , बुध्दीमान , गुणवंत , गुणवत्ता प्राप्त लोगों को सही मायने में किमत मिलती है ?
आखिर वजह क्या है इसकी ❓
देश के अंदर फैली हुई सामाजिक सौहार्द के बजाए फैली हुई सामाजिक और सामुहिक विचारों की गंदगी जो सच्चे , अच्छे , नेक लोगों को आगे आने नहीं देती ? उल्टा ऐसे प्रतिभा संपन्न लोगों को हमेशा जानबूझकर अपमानित , प्रताडित किया जाता है ?
उनका हर जगहों पर मानसिक उत्पीडन किया जाता है ⁉️
अगर हाँ तो इसकी वजह क्या है और कारण मिमांसा क्या है ?
अपने देश के अनेक नामवंत व्यक्तियों को , महात्माओं को , इस देश में यथोचित सन्मान और स्थान नहीं मिला जो विदेशों में जाकर उन्हे प्राप्त हुवा ?
और विशेष बात यह है की , जीनकी कीमत इस देश में शून्य के बराबर थी… ऐसे लोगों ने विदेशों में जाकर बहुत ही मान सन्मान तथा धन भी प्राप्त किया…!?
क्या सचमुच में बव्हंशी भारतीय समाज को किडे मकौडै जैसे गंदगी में जीने जैसी आदत सी हो गई है ?
और आज भी यह सामाजिक सामुहिक उद्रेक लगातार जारी है ?
इससे तंग आकर अच्छे लोग विदेशों में भागने की और अपना स्थान और नाम कमाने की कोशिश करते है ?
यह एक बहुत ही बडी देश के अंदर लगी हुई सामाजिक बिमारी है !
सडे हुए दिमाग के लोग ? अपने ही अच्छे और सच्चे लोगों की सहायता करने के बजाए उल्टा उन्हे ही नीचे धकेलने की लगातार कोशिश करते रहते है ?
विशेषतः अपने लोग ?
पराया तो पराया ही होता है ! मगर अपनों से ही हतोत्साहीत , अपमानित , प्रताडित किया जाता है तो ❓⁉️ यह देश तो गजब के लोगों का ही है ! और ? गजब के मानसिक विकृत लोगों का ही है !
तो ऐसे विकृत मानसिकता वाले लोगों में रहकर क्या सचमुच में किसी अच्छे लोगों का , विचारवंतों का , बुध्दी वादीयों का ? सचमुच में विकास भी हो सकता है ?
बताईये ?❓⁉️
और इसका अंतिम इलाज भी क्या है ?
कहने लिखने के लिये तो बहुत कुछ है…!
सचमुच में मन का बडप्पन , एक दूसरे के प्रति स्नेहभाव , सहयोग की भावना ? कितने लोगों में दिखाई देती है ?
कोई आगे बढ रहा है तो उसके प्रती भयंकर जलन , पाॅंव नीचे खिंचना , इर्षा , निंदा जैसे गंदे प्रकार ही हमारे भारतीय समाज में जादा तौर पर दिखाई देते है…?
इतनी भयंकर सामाजिक बिमारी तथा सामाजिक गंदगी हमारे ही देश में आखिर फैल क्यों गई और कैसे फैलाई गई ?
ऐसे भयंकर नारकिय जीवन प्रणाली को समाज को उपर उठाने के लिये उपर्योक्त प्रयास भी होंगे या नहीं ?
या फिर यह समाज आजीवन ऐसे ही गंदगी में पडा रहेगा ?
जाती पाती का जहर , सामाजिक विषमता , सच्चे लोगों के प्रति समाज के मन मन में आदर के बिना उच्च कोटी का घृणा का भाव…विना वजह तिरस्कार की भयंकर मानसिकता ? इससे भी ऊपर हमारा समाज उठेगा भी या नहीं ?
अरे…
स्वयं ईश्वर भी इस धरती पर अवतरीत होगा ना ? तो ❓
उसे भगाने के भी प्रयास और भयंकर षड्यंत्र इस देश में रचे जायेंगे…
जी हाँ…
इतिहास साक्षी है…
और आज भी यही चल रहा है…
तो अच्छे और सच्चे लोग तो अंदर ही अंदर उदास होकर विदेशों में भागने की ही कोशिश करेंगे ना ?
आपको क्या लगता है ⁉️❓
क्या आप भी विचारवंत , बुद्धीवान तथा गुणवंत हो और ? आज भी संन्मान की बजाए प्रताडना से ही पिडीत हो…??
तो विदेश जाने का विचार तो मन में जरूर आयेगा ही आयेगा…
उबगकर…
मगर ?
हर एक अच्छे और सच्चे लोगों के नशीब में विदेशी जाने का सपना कभी हकीकत में बदलता ही नहीं है ?
ऐसे लोगों को इस भयंकर दलदल में आजीवन सडे रहने का ही शाप होता है…
भयंकर नारकिय जीवन जीने के लिये ही मजबूर रहना पडता है !
जो भी लोग ऐसी भयंकर गंदगी , दलदल से बाहर निकल गये और विदेशों में जाकर स्थिर हो गये और नाम भी और धन भी कमाया ? ऐसे लोग सचमुच में परम भाग्यवान के श्रेणी में आते है !
राम की भूमी से ?
रावण राज कब खतम होगा ? और ?
सच्चे अच्छे और प्रामाणिक लोगों को कब न्याय मिलेगा ?
यह तो नियती ही तय करेगी…
मैं भी मेरी अगली अंतरराष्ट्रीय फिल्म निर्माण के लिये विदेश में जाने के लिये सोच रहा हूं !
यहाँ पर मुझे कौन पुछेगा भी ? और यहाँ ? इस भयंकर दलदल में और घोर नारकिय जीवन में मेरी थोडे ही दाल गलने वाली है…⁉️❓
🙏🙏🕉️🚩
*जय श्रीकृष्ण…*
