Tue. Jul 21st, 2026

क्या तुम्हारे अंदर खून है…???

 

भारतीयों का गौरवशाली इतिहास हमें क्यों नही पढाया गया ???

साथीयों,
हमारे भारतीयों का इतिहास एक जबरदस्त शक्तिशाली प्रेरणास्रोत है हमारे लिए।ऐसे किर्तिमान आदर्श हमारे देश में स्थापित हुए है।और हमें ही ऐसी सत्य घटनाओं से दूर रखा है।
आखिर क्यों ?
किसने किया ऐसा ?
कौन है षड्यंत्र का असली सुत्रधार ?

क्या तुम्हारे अंदर खून है ?
और ऐसे अत्याचारों के खिलाफ तुम्हारा खून सचमुच में खौलता है ?

अगर हाँ…
तो हमारा साथ दिजिए।
मैं,
विनोदकुमार महाजन
और मेरे परमस्नेही
प.पू.लक्ष्मण बालयोगीजी और उनके हजारों सहयोगी,
हम सबने मिलकर,
वैश्विक क्रांति का,
संपूर्ण परिवर्तन का,
अगस्त क्रांति का,
बिडा उठाया है।

साथीयों,
हमारे वैश्विक अभियान में आप सभी मानवता प्रेमीयों को,सभी ईश्वर प्रेमीयों को,सभी जात – पथ – पंथीयों को ,और सनातन प्रेमी सभी धर्मीयों को इस अभियान में जूडकर, तन – मन – धन से जुडकर, संपूर्ण समर्पित भाव से योगदान देना है।

साथियों,
यूग बदल रहा है,समय करवट बदल रहा है।
ईश्वरी सिध्दांतों की अंतीम जीत तथा वैश्विक मानवीय समुह को और सभी सजीवों को सुख – चैन से जीने के लिए, उन सभी के निसर्ग दत्त अधिकारों को कायम करने के लिए,

हमने शंखनाद किया है।
लक्ष्मण बालयोगीजी ने कुरूक्षेत्र में जाकर, शंखनाद किया है।
अब सत्य की जीत के लिए, ईश्वरी सिध्दांतों की अंतीम जीत के लिए,

मनोवैज्ञानिक तरीकों से चारों तरफ से यूध्द होगा।
और इसमें हम जीतकर ही रहेंगे।

संपूर्ण वैश्विक परिवर्तन के हमारे अभियान में आप सभी को जूडना ही है।

हिंदु महापंचायत और
विश्व स्वधर्म संस्थान
आप सभी को सादर आमंत्रित करता है।

अब पढीये यह पोलैंड की कहानी,जो हमारे गौरवशाली इतिहास की साक्ष है।
अगर पोलैंड हमारे महापुरुषों को आदर्श मानता है….?
तो….?
हम ही हमारे आदर्शों को क्यों भूल गये ?
आक्रमणकारियों को यहाँ का आदर्श क्यों और किसने बनाया ?

सोचो,समझो,जानो।
और संपूर्ण क्रांति के लिए, संपूर्ण वैश्विक परिवर्तन के लिए,
तैयार हो जावो।

दूसरे विश्व युद्ध के समय, पोलेंड पुरी तरह तबाह हो गया था. सिर्फ औरतें और बच्चे बचे थे. बाकी सब वहां के पुरुष युद्ध में मारे गए थे.

पोलेंड की स्त्रियों ने पोलेंड छोड़ दिया क्योंकि वहां उनकी इज्जत को खतरा था. तो बचे खुचे लोग और बाकी सब महिलाएं व बच्चे से भरा जहाज लेकर निकल गए, लेकिन किसी भी देश ने उनको शरण नहीं दी.

फिर यह जहाज भारत की तरफ आया. वहां गुजरात के जामनगर के तट पर जहाज़ रुका. तब वहां के राजा *जाम दिग्विजय सिंह जाडेजा* जी ने उनकी दिन हीन हालत देखकर उन्हें आश्रय दिया. न केवल आश्रय दिया, अपितु उनके बच्चों को _आर्मी_ की _ट्रेनिंग_ दी, उनको पढ़ाया, लिखाया, बाद मे उन्हें हथियार देकर पोलेंड भेजा जहां उन्होंने जामनगर से मिली _आर्मी_ की _ट्रेनिंग_ से देश को पुनः स्थापित किया.

आज भी पोलेंड के लोग उन्हें अन्नदाता मानते हैं. उनके संविधान के अनुसार *जाम दिग्विजय सिंह* जी उनके लिए ईश्वर के समान हैं. इसीलिए उनको साक्षी मानकर आज भी वहां के नेता संसद में शपथ लेते हैं.

यदि भारत में दिग्विजय सिंह जी का अपमान किया जाए तो यहां की कानून व्यवस्था में सजा का कोई प्रावधान नहीं है. लेकिन यही भूल पोलेंड में करने पर तोप के मुंह पर बांधकर उड़ा दिया जाता है.

जानते हो ये पोलेंड वाले जाम नगर के महाराजा दिग्विजय सिंह जाडेजा जी के नाम पर क्यों शपथ ले रहे हैं?

क्या आप जानते हो आज युक्रेन से आ रहे भारत के लोगों को पोलेंड बिना वीज़ा के क्यों आने दे रहा अपने है अपने देश में?

आज भी पोलेंड जाम साहब के उस कर्म को नहीं भूला है. इसलिए आज भारत के लोगों को बिना वीज़ा के आने दे रहा है. उनकी सभी प्रकार से मदद कर रहा है.

क्या भारत के इतिहास की पुस्तकों में कभी पढ़ाया गया दिग्वज सिंह जी के बारे में? यदि कोई पोलेंड का नागरिक भारतीय को पूछ भी ले कि, ”क्या आप जामनगर के महाराजा दिग्वज सिंह जी को जानते हो?” तो हमारे युक्रेन में _डॉक्टर_ की पढ़ाई करने गए भारतीय छात्र कहेंगे, _”नो एक्च्युलि ना… नो, वी डोंट नो हू ही वॉज.”_ थू है ऐसी शिक्षा व्यवस्था पर जिसने अपने ही जड़ों से काटकर रख दिया है हमें।

हरी ओम्

🕉🚩 जय हिंद ! 🚩🕉

संकलन : – विनोदकुमार महाजन

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