
*क्रूर बनेंगे ? तभी* *बचेंगे ??*
✍️ २८३५
*विनोदकुमार महाजन*
🔥🔥🔥🔥
जी हाँ साथीयों …
क्या बिल्कुल सच लिखा है मैंने….?
क्योंकी शायद ? यह हमारे अस्तित्व की लडाई है…?
और जब हमारे अस्तित्व का ही प्रश्न उपस्थित होता है तब ? अपना अस्तित्व बनाये रखने के लिये, लगभग हर एक सजीव प्राणी हिंस्त्र , क्रूर बनता ही है !
यह तो उपद्रवी शक्तियों से, खुद को बचाने का नैसर्गिक उपाय भी और नियम भी होता है !?
और ? जब क्रूर नहीं बनेंगे तो नहीं बचेंगे !?
क्रूर बनेंगे तो ही बचेंगे !?
सहिष्णू बनकर जियेंगे तो ? नामशेष हो जायेंगे !?
ऐसी भयंकर विपदाओं की स्थिती निर्माण होगी तो आखिर क्या करोगे ?
क्योंकी हमारा…हमारे आदर्श संस्कृती का, वास्तव यही है की , हम सदीयों से सहिष्णू बनकर भाईचारा निभाते आ रहे है … और हमारा भाई ?
हमारा ही चारा बनाकर , एक जबरदस्त छद्म निती बनाकर , हमें नेस्तनाबूत करने के अनेक गुप्त रास्ते अपना रहा है ?
और हम ?
भाई के झूटे मकडजाल में , प्रेम और इंन्सानियत के चक्कर में फॅंसकर , हम रफू चक्कर बनते जा रहे है…?
यही तो बडा घनचक्कर है और ? यही तो बडा खेला है ?
उपर से मिठी मिठी बातें ? और अंदर ? हमारे ही विनाश का भयंकर जालिम जहर ?
और हमें आजतक ?
यह समझ में ही नहीं आ रहा है ??
सचमुच में कितने भोलेभाले है हम ? कितने सिदेसादे है हम ?
या फिर मुर्ख ही है हम ?
कोई हमें सदीयों से मुर्ख बनाता आ रहा है…? षड्यंत्रों द्वारा फॅंसाता आ रहा है…?
धिरेधिरे हमें नामशेष करता आ रहा है ?
हर जगहों से एक भयंकर कुट निती से हमें सदैव भगाता ही आ रहा है…?
और हम अंधेरे में रहकर झूटा भाईचारा निभा रहे है ??
आश्चर्य है ना बहुत बडा ?
यह हमारी और उनकी भी ? सच्ची मानवता है या फिर झूटी मानवता ?
हमारा सच्चा शुभचिंतक है ? या धिरेधिरे गले का फांस मजबूत करने वाला गुप्त हितशत्रू ?
धिरे धिरे अपनी शक्ती बढाने वाला ? अनजान और जहरीला अजगर ?
काश्मीर में यही हुवा था ना ?
याद है ना आप सभी को ?
हमें भूलने की सदियों की आदत है , इसिलिए पूछा…!
और फिर भी इतना भयंकर होने के बावजूद भी हम ?
आज भी अंधे ? गूंगे ? बहरे ? या फिर मुर्ख ?
बनकर रह रहे है ?
उपर से वो हमारा दोस्त सच्चा और अच्छा लगता है…
बहुत भूलभैलैया करता है…सदियों से उसकी यह ड्रामेगिरी चलती आ रही है !
मगर अंदर से घात लगाकर बैठा हुवा है… हमें नामशेष करने के लिये ?
और हम ? फिर भी ?
गहरी निद्रा में ?
धन्य है ना ऐसे समाज की ?
तो आखिर ?
इसी भयंकर मुर्खता के कारण आज ?
आज हमारे अस्तित्व का ही प्रश्न निर्माण हो गया है !
चारों ओर से हमें क्रूरता से घेरा गया है और क्रूरता से घेरा भी जा रहा है !
बिल्कुल यही होता आ रहा है…आज भी ?
चारों ओर से भयंकर विनाशकारी आग लगी हुई है ! और हम…
झूटे भाईचारे के चक्कर में…पैसा कमाने के होड में , आपसी बैर में , कलह में लटककर ,
समाप्ती की ओर…
धकेलते जा रहे है ?
ऐसे में भी ? जो हमारे सच्चे हितचिंतक है ? उनकी तन मन धन से पूरी सहायता करने के बजाए ?
उन्हे ही चारों ओर से बरबाद , नेस्तनाबूत करने के लिये तुले हुए है ?
नमकहराम , बेईमान , गद्दार जयचंद…?
आज भी हमारे सच्चे राष्ट्र भक्तों को चारो ओर से नामोहरम कर रहे है ?
आश्चर्य ? महद् आश्चर्य ??
विनाशकाले विपरीत बुद्धी : ???
समय भयंकर खराब है !
चारों ओर से गुप्त रूप से माहौल भयंकर विनाशकारी है !
जो सजग है…जिसकी चेतना अखंड जागृत है…वह ? सभी पुण्यात्माएं इसके कारण…?
चिंतीत भी है…?
इसिलिए आज समय केवल जागने का नहीं है बल्की ?
क्रूर बनकर ही क्रूरता को ही सदा के लिये मिटाने का है !
तभी ? धर्म बचेगा , संस्कृती बचेगी , आदर्श सिध्दांत बचेंगे…
अन्यथा…?
पाकिस्तान , अफगानिस्तान , बांगलादेश की तरह…?
हमेशा के लिये…?
*स्वाहा…!!*
सोचो अथवा समाप्त हो जाओ… अस्तित्व शून्य हो जाओ…
*क्रूर बनेंगे ? तो ही* *बचेंगे ?*
*धधगता ईश्वरी तेज* *नारसिंह भगवान की* *जय…!!!*
*कल्की अवतार की* *जय…!!!*
🙏🙏🙏🚩
