
*मच्छर ? कान के* *नजदिक आकर क्यों* *चिल्लाते है…??*
✍️ २८५३
*विनोदकुमार महाजन*
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सोचनीय बात…?
पापी पेट का सवाल ?
वैसे तो हर सजीवों को , ईश्वर ने पेट दिया है और ? पेट भरने की कुछ कला भी अवगत करायी है !
और इसी के तहत पेट भरने के लिये , एक रणनीती बनाकर , अपने शिकार पर हमला करता है !
हर पशुपक्षीयों की यह रणनीती अलग अलग होती है !
इसमें भी कोई शाकाहारी है , कोई मांसाहारी है तो कोई ?
रक्त पिपासू ?
मच्छर , खटमल जैसा !
इतना सा छोटासा देह होता है मच्छर का !
और उसका दिमाग भी कितना छोटासा होगा !
और उसी छोटेसे दिमाग से , खून चुसने के लिये , रक्त पिने के लिये , पेट भरने के लिये , एक रणनीती बनाता है !
इसिलिए वह छोटासा जीव , हमारा अंदाज लेने के लिये , मतलब ?
शिकार सोया है या फिर जागा है ? इसका अचूक अंदाज लेने के लिये ,
कान के नजदिक आकर जोर से…
” गुंई….$$$ ” ऐसा विचित्र आवाज निकालता है !
अगर हम जागे हुए है तो ? उसको फटकारते है ? और अगर सो गये है तो ?
काम तमाम…
मच्छर खून चूसकर चला जाता है और उपर से ?
डेंग्यू , मलेरिया के व्हायरस हमारे अंदर छोड देता है !
एक मच्छर भी ?
शायद किसीकी जान तक ले सकता है !
इसिलिए तो नाना पाटेकर अपने एक फिल्म में डायलॉग बोलते है…
” साला एक मच्छर भी आदमी को हिजडा बना देता है…! ”
सचमुच में ईश्वर भी कमाल का है !
क्या जरुरत थी आखिर ईश्वर को भी ? ऐसे जीव जंतू बनाने की , उपद्रवी जीव ? क्या जरुरत थी ईश्वर को चौ-याशी लक्ष योनी बनाने की ? क्या जरुरत थी ईश्वर को आखिर संजीव सृष्टी बनाने की ? अथवा
महाउपद्व्यापी ? मनुष्य प्राणी बनाने की ?
खैर… ईश्वर की लीला ईश्वर ही जाने !
तो मुख्य विषय है…
रणनिती… व्यूहरचना…
एक छोटासा जीव भी , मच्छर भी ? खून चूसने की रणनीती बनाता है ?
तो मनुष्य प्राणी कितनी भयंकर रणनीती अथवा व्यूहरचना बनाता होगा ?
छोटेसे दिमाग वाला मनुष्य प्राणी , हाथी , शेर जैसे प्राणीयों को भी ? अजस्त्र और क्रूर प्राणीयों के दिमाग को भी ? अपने कब्जे में करके ? उसे वश में कर देता है , और उनसे भी कार्य करवाता है !
छोटेसे दिमाग का , छोटेसे देह का मनुष्य प्राणी , बडा करामती होता है…
और एक जबरदस्त शक्तिशाली रणनीती बनाकर सच्चे धर्म को भी ? अ – धर्म में परिवर्तीत करता है और विश्व पर राज करता है ?
सही मायने में संपूर्ण विश्व पर आज कौन राज कर रहा है ?
ईश्वराधिष्ठित सनातन हिंदू धर्म ? या फिर और कोई ?
बात तो सोचने की है !
अनेक धर्मों में आज विश्व का बॅंटवारा हुवा है , यह वास्तव है !
मगर इसमें सत्य सनातन धर्म कहाॅं पर है ?
ईश्वर निर्मित सत्य सनातन धर्म ?
संपूर्ण विश्व में सभी धर्मीयों के अनेक देश निर्माण किए गये ? मगर ?
संपूर्ण विश्व पटल पर ?
एक भी हिंदू राष्ट्र नहीं है !
हिन्दुओं की विस्तार वाद की भूमिका कभी भी नहीं है , और नाही कभी थी !
मगर फिर भी ?
अपना , अपने आदर्श संस्कृती का , अस्तित्व बनाये रखने के लिये ?
प्रयास करना भी तो जरूरी था ना ?
सभी धर्मीयों ने उनके धर्म बढाने की अचूक रणनीती बनायी तो ? हम ? क्यों और कैसे पिछे रह गये ?
खुद का अस्तित्व बनाये रखने के लिये ? एक छोटासा मच्छर भी रणनीती बनाता है ? तो ?
हम ही पिछे क्यों रह गये ?
एक छोटासा प्रश्न ?
सभी हिन्दुओं को है !
हमारी रणनीती कहाॅं अधूरी रह गयी और क्यों अधूरी रह गयी ?
साम्राज्य वाद का मैं स्विकार नहीं करता हूं और नाही साम्राज्य वाद से संपूर्ण समस्याओं का समाधान या हल होता है !
इसिलिए साम्राज्य वाद का विस्तार यह विचार धारा भी गलत हो सकती है !
मगर क्या ?
ईश्वराधिष्ठित समाज रचना और उसी आदर्श सिध्दांतों के अनुसार , संपूर्ण विश्व के मानवी समुह तथा संपूर्ण सजीव सृष्टी का कल्याण ? यह धारणा या विचारधारा गलत हो सकती है ?
और अगर सत्य सनातन धर्म में ऐसी सभी के कल्याण की संपूर्ण क्षमता और शक्ती भी है तो ?
इसका स्विकार संपूर्ण पृथ्वी निवासी ? मनुष्य प्राणी को करना ही होगा…जी हाँ…!
और यही सही और सच्ची विश्व कल्याण की तथा वसुधैव कुटुंबकम् की व्याख्या भी होगी…!
मगर इसके लिए तथा इसकी अंतिम जीत के लिये ? एक अचूक , यशस्वी , शक्तिशाली रणनीती बनाकर उसपर अमल करने की जरूरत है !
तीव्र इच्छाशक्ती सभी असंभव कार्यों में ? संभव में बदल देती है !
सोचो…
एक छोटासा मच्छर भी ? एक अचूक रणनीती बनाकर यशस्वी होता है तो ?
हमारे जैसे सभी ईश्वरी वरदान प्राप्त सनातनीयों को ? हिंदू धर्म प्रेमीयों को ? ईश्वराधिष्ठित समाज रचना का स्विकार करनेवालों को ?
असंभव क्या रहेगा…?
*भगवान श्रीकृष्ण की* *जय*
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