
*अच्छे कार्यों के लिये ?*
*पैसा ? कोई भी नहीं* *देगा…??*
✍️ २८४१
*विनोदकुमार महाजन*
💰🪙💵💷
*दुनिया धन से चलती है!*
और दुनियादारी में धन ही सबसे बडा और सबसे उपर होता है !
इसिलिए दुनिया ना प्रेम से चलती है , ना ही सत्य से चलती है अथवा ना ही इमानदारी से चलती है !
केवल धन से चलती है !
इसिलिए धन और धन की खनखनाहट का बहुत ही महत्व हर एक के जीवन में होता ही है !
धन चाहिए धन !
हर एक को धन चाहिए !
पैसा , डाॅलर , मनी से क्या नहीं मिल सकता है ?
सबकुछ मिल सकता है !
सभी प्रकार के सुख , धन से मिलते है !
इसिलिए हर एक को धन चाहिए ही चाहिए !
धन काला हो या गोरा ,
भला हो या बुरा ,
आखिर धन चाहिए !
ऐसी सामाजिक धारणा भी होती है !
अच्छे जीवन के लिये ?
धन चाहिए !
ऐशो आराम की जीवनपद्धती के लिये ?
धन चाहिए !
समाज में प्रतिष्ठा प्राप्त करने के लिये ?
धन चाहिए !
संन्मान से जीने के लिये ?
धन चाहिए !
सभी प्रकार की बाधाओं को, कष्ट को मिटाने के लिये ?
धन चाहिए !
सभी कार्यों के लिये और उसकी सफलता के लिये ?
धन चाहिए !
सामाजिक कार्य के लिये , धार्मिक कार्य के लिये ?
धन चाहिए !
मगर यह धन आयेगा कैसे और कहाॅं से ?
आज हर एक व्यक्ती धन वैभव कमाने के होड में तो लगा हुवा है !
बच्चों को ? धन चाहिए !
युवाकों को ? धन चाहिए !
वयस्कों को ?
धन चाहिए !
स्र्ती पुरूष सभी को ?
धन चाहिए !
जो धन = वान होता है ?
उसीका ही होता है =
मान संन्मान ?
देश के सभी धर्मीयों को ?
( केवल हिंदू छोडकर ?? 👆🤫🤔🫣 )
उनके धार्मिक कार्य के लिये ?
धन देने के लिये ?
उनका ? धर्म बढाने के लिये ? अनेक देश ? फंडिंग करते है… निरंतर… लगातार…!
मगर ? हिंदुओं के धार्मीक कार्य बढाने के लिये ? कौन धन देगा ?
कोई भी नहीं !
शायद ?
सभी नैतिक अनैतिक कार्यों के लिये ?
धन मिलेगा !
जैसे ?
गैरकृत्य करने के लिये?
दंगा फसाद करने के लिये ? अधर्म बढाने के लिये ? धन मिलेगा !
बहू मात्रा में धन मिलेगा !
मगर अच्छे , सच्चे कार्यों के लिये ?
लगभग हर एक को ?
धन के लिये ?
तरसना पडेगा !
कोई भी सहयोग नहीं करेगा…??
आखिर धन वैभव भी तो ? नशीब से ही मिलता है ? ऐसा कहते है !
मगर सोने की चिडिया वाले हिंदू देश में आज ?
हिंदुत्व के कार्य के लिये भी ? धन नहीं मिलता है ?
धन के लिये ?
बहुत तरसना और तडपना पडता है ?
लगभग हर एक ? ( नब्बे प्रतिशत ?? ) हिंदू ? गरीब ? निर्धन ?
हो गये ?
या बनाये गये ?
सुनियोजित षड्यंत्रों द्वारा ?
ऐसा कैसे उल्टा पुल्टा हो गया ?
राजा विक्रमादित्य के समय में हर हिंदू सधन , संपन्न , धनवान था ?
तो आज ? देश की और ? हिंदुओं की ? इतनी दुर्दशा कैसे हो गयी ?
धन वैभव देने वाली माता महालक्ष्मी का यह देश ?
आखिर इतना कंगाल कैसे बन गया ?
किसने बनाया ?
या फिर ? माता महालक्ष्मी ही इस देश में ? रूष्ट हो गयी ?
और आखिर अंतिम प्रश्न तो है ही…की..
हमारे देश को ? हमारे देश के लगभग हर हिंदू को ?
धन वैभव संपन्न कैसे बनाएंगे ?
उनके नेक , सच्चे , अच्छे धार्मिक कार्यों के लिये ? धन की बरसात ? कैसे करायेंगे ?
ऐसी कोई तो भी तरकीब ? सोचनी ? निकालनी होगी की…?
मेरा हर हिंदू बांधव धन संपन्न हो ? सुखी समाधानी आनंदी हो ?
धर्म कार्य बढाने के लिये ? हर एक हिंदू के पास ? विपूल धन वैभव हो ?
क्या यह सबकुछ ?
ऐसा सबकुछ ?
हो सकेगा ?
जी , जरूर हो सकेगा !
भगीरथ राजा ने ? भागीरथी नदी को अथक प्रयास से धरती पर प्रकट किया है ?
जो भागीरथी गंगा आज भी इसका प्रमाण है !
ऐसी चमत्कारी भूमी में ? क्या सचमुच में असंभव भी कुछ रहेगा ?
बिल्कुल नहीं !
मगर हमें फिरसे जरूरत है ? भगीरथ राजा जैसे महान पुण्यात्मा की जो ?
परमात्मा को भी बता सके की ?
मेरे देश का और संपूर्ण विश्व का ? ईश्वर पूजक ?
मेरा हिंदू बांधव ?
धन वैभव संपन्न होना चाहिए ! ऐश्वर्य संपन्न होना चाहिए !
साथ में सुसंस्कृत भी , संस्कृती पूजक भी !
साथ में ?
आदर्श संस्कृती के पुनरूत्थान का वैभवशाली ? भारत भी ?
बनना चाहिए !
मगर ऐसे दिव्य संकल्प के पुर्ती के लिये ?
आखिर आगे आयेगा कौन ?
विष्णू लक्ष्मी कुबेर यक्ष की यह महान भूमी को ?
फिरसे ? वैभवशाली बनायेगा कौन ?
तीव्र इच्छाशक्ती होगी तो ? असंभव भी संभव में बदलेगा !
चलो ,
आज हम सब मिलकर कम से कम आज ऐसा भव्य दिव्य और सभी के संपूर्ण कल्याण का सर्वोच्च संकल्प तो करते है ?
सब मिलकर ?
या फिर इसमें , इस पवित्र संकल्प में भी ?आपसी लडाई झगडा , आपसी बैर और जातीवाद का भयंकर और जालीम जहर भी रहेगा ?
क्योंकी हमारे भारतीयों की , हर काम में टांग अडाने की आदत जो है ?
फिर कार्य अच्छा हो या ना हो ?
धन वैभव की खनखनाहट सभी के आंखों की पट्टी ? शायद ? खोलती ही है …होगी भी !
धन वैभव से मोहित होनेवाला शायद धरती पर कोई मानव प्राणी नहीं होगा ?
मगर यहाँ , हमारे इस देश में ?
होता क्या है की ?, हर एक व्यक्ती केवल अपनी अपनी ही सोचता है और ? सारी शक्ती अपने खुद के लिये ? खुद को पैसा कमाने के लिये ही ? सोचता है !
केवल अपने परिवार का ही सोचता है !
मगर,
खुदगर्ज समाज जब सामाजिक न्याय के लिये प्रेरीत होता है ? सामाजिक उत्थान के लिये प्रयत्नशील रहता है ?
आपसी मतभेद , जातिभेद भूलकर एक छत्र ? भगवा छत्र ?तब ? महाक्रांती होती है !
मगर स्वार्थी , मतलबी लोग , समाज और ऐसी समाज रचना थोडे ही महाक्रांती का बिगुल बजायेगी ?
लगभग हर एक को यहाँ खुद की , अपनी अपनी पडी है…!
धन कमाना है तो ?
केवल खुद के लिये और ? खुद के परिवार के लिये ?
केवल खुद को और खुद के परिवार को ही ?सभी प्रकार के सुख चाहिए ?
बस… लगभग हर एक के जीवन का मकसद यही होता है..
यह मकसद पुरा हुवा तो ? जीवन सार्थक हुवा..!?
बाकी समाज जाये भाड में …!
इसीसे समाजोन्नती और राष्ट्रोद्धार थोडे ही होगा ?
तो साथीयों,
आवो चलो कुछ नया सोचते है…
नया संकल्प करते है …
एक इतिहास बनाते है …
कम से कम ऐसा प्रयास तो करते है…!!
सभी का कल्याण हो !
सभी का मंगल हो !
वसुधैव कुटुंबकम्
का अर्थ सभी को समझे !
तो ? ऐसा होनेपर ?
भारत को विश्व गुरू होने से कौन रोकेगा ?
इसके लिए चाहिए ?
सामुहिक तीव्र इच्छाशक्ती की और ?
अथक प्रयत्न वाद तथा परिश्रम की जरूरत !
दिव्यत्व ही भव्यत्व होता है !
और विश्व कल्याण के लिये ? संपूर्ण समाज को खुद के पिछे ?
खींचकर ले आना ही ?
असली नेतृत्व होता है !
इसिलिए सबसे पहले ?
देश को और देशवासिओं को ? कंगाल बनानेवालों को सबक सिखानी होगी !
तीव्र इच्छाशक्ती के बलपर…
एक छोटासा देश…
इस्रायल ?
इतनी उंची उडान भर सकता है तो ?
हमारे लिये ? असंभव क्या है ?
दियास्वप्न देखने से संकल्प पूरे नहीं होते है तो ? अच्छे संकल्प , अचूक रणनीती और अथक प्रयास से संकल्प जरूर पूरे होते ही है !
चलो नये समाज की ओर !
संपन्न भारत की ओर !
*आज मैं*
*सर्वव्यापी ईश्वर को* *साक्षी रखकर*
*यह शपथ लेता हूं और* *संकल्प करता हूं* *की , मेरे देश का हर* *हिंदू और विश्व का* *संपूर्ण हिंदू समाज* *धनवान तथा* *धनसंपन्न बनाने* *के लिये , मैं* *निरंतर , लगातार ,* *चौबिसों घंटे प्रयास जारी* *रखुंगा !*
*सभी के अखंड कल्याण* *से ही मेरा* *कल्याण भी संभव* *होगा !*
*सभी की आर्थिक* *संपन्नता और* *सांस्कृतिक संपन्नता यह* *मेरे जीवन का* *और ? हर एक हिंदू* *बांधव का दायित्व* *है…जो हम जल्द अती* *जल्द पूरा करके* *ही रहेंगे !*
( सभी हिंदुओं को आज यह शपथ लेनी पडेगी और ऐसा शुभ संकल्प करना ही पडेगा !
*एक सामुहिक प्रार्थना*
जीवन की दशा और दिशा बदल देती है ! )
*बोलो लक्ष्मी नारायण* *की त्रीवार* *जयजयकार हो…*
💰💰💰✅
