
*सावरकरजी का* *प्रायोपवेशन*
✍️ २७६२
*विनोदकुमार महाजन*
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सावरकरजी का शब्दों में वर्णन करना , शायद किसी के बस की बात नहीं है !
संयम, विवेक , उच्च कोटी का बैराग्य , प्रखर राष्ट्रनिष्ठा , कवित्व , लेखक , नाटककार, कट्टर हिंदुत्ववादी, क्रांतिकारी , दूरगामीत्व जैसे अनेक ईश्वरी गुणों का संगम मतलब… सावरकर !
इतिहास में ऐसा महान व्यक्तित्व शायद नहीं मिलेगा और नाही भविष्य में !
राष्ट्र के लिये सबकुछ नौछावर करके , संपूर्ण जीवन ही समर्पण भाव से बिताने वाला एक महान हिंदुत्ववादी योध्दा मतलब सावरकर !
वह काला पानी , काला पानी की भयंकर और नारकीय यातनांओं का अनेक सालों का खडतर जीवन !
*कौन भोग सकता है* *इतना भयंकर दुखदर्द ?*
कोल्हू खिंचना , तेल निकालना कितना भयंकर था ?
फिर भी उपेक्षा , उपेक्षा और उपेक्षा !
आजीवन उपेक्षा !
आजादी के पहले भी उपेक्षा और आजादी के बाद भी उपेक्षा !
भयंकर उपेक्षित जीवन !
वास्तव में आजादी के बाद प्रधानमंत्री बनने की योग्यता सावरकरजी की ही थी !
मगर कुछ दुष्ट षड्यंत्रकारी और कपटी हिंदुत्वद्रोहीयों ने हिन्दुओं के साथ भयंकर छल कपट करके, केवल एक ही मत के बल पर सर्वोच्च सत्ता हतीयायी और वही हीरो बन गये !?
जरा गौर से सोचो इव्हिएम हैक तो उसी वक्त हुवा था !
आज इव्हिएम का रोना रोने वाले जरा इतिहास के पन्नों को गौर से देखिए !
वास्तव में आजादी सावरकर , सुभाषबाबू , जैसे अनेक क्रांतिकारीयों के कारण मिल गयी थी !
और आजादी का श्रेय किसने लिया ?
*बिना खड्ग बिना ढाल ,*
आजादी कैसे मिल सकती है ?
मगर *एजेंडा* क्या चलाया ?
किसने चलाया ?
*कौन है दुष्ट* *षड्यंत्रकारी ?*
जो सत्य को और सत्य सनातन को सदा के लिये दबाना , कुचलाना चाहते थे ?
सावरकर, सुभाषबाबू , वल्लभभाई पटेल जैसे महान और प्रखर राष्ट्रप्रेमी व्यक्ती प्रधानमंत्री बनते तो देश की आज की स्थिती कैसे होती ?
कौन था असली हिंदुद्रोही ?
वास्तव जानकर खून खौलता है ऐसे गद्दार , नमकहराम , हिंदुत्वद्रोहीयों के , राष्ट्रद्रोहीयों के , षड्यंत्रकारीयों के विरूद्ध !
आज भी जनमानस में वही दुष्टात्मे हीरो बन बैठे है ?
पहचानो इन्हे !
आज भी सावरकरजी के विरूद्ध कुछ नालायक , गंदे लोग , अभद्र भाषा का प्रयोग करते है ?
शरम आनी चाहिए ऐसे नमकहराम , गद्दार , हिंदुत्वद्रोही और सावरकर विरोधीयों को !
ऐसे लोगों को वास्तव में , एक मिनिट भी , हमारे संस्कृती प्रधान देश में रहने का भी अधीकार नहीं है !
ऐसे गद्दारों को कठोर कानून बनाकर , धक्के मारकर , देश से बाहर भगाना चाहिए !
वहीं नालायक लोग देश में राज करने का सपना देखते है ?
और हिंदू समाज यह तमाशा खुले आम से देखता रहता है ?
हिन्दुओं का खून कैसे नहीं खौलता है ऐसे घटनाओं के विरूद्ध ?
अनंत यातनाएं सहने के बाद , सावरकर जैसे पुण्यपुरूष को , महापुरुष को , प्रायोपवेशन करके देहत्याग करना पडा ?
वह भी हिन्दुओं के देश में ?
और हिंदू समाज मौन बनकर यह तमाशा खुले आंखों से देखता रहा ?
मगर सत्य तो सत्य होता है !
सत्य को चाहे कोई कितना भी दबाने की , मिटाने की कोशिश करें ,
एक दिन सत्य तो बाहर आता ही है !
सावरकरजी का भी ऐसा ही होगा !
जिन्होंने सावरकर नाम के शक्तिशाली तूफान को
दबाने की कोशिश की , मिटाने की कोशिश की ,
वह सब एक दिन मिट जायेंगे !
उनका सदा के लिये नामोनिशाण मीट जायेगा !
ऐसे राष्ट्रद्रोहीयों के एक दिन समाज स्वयंस्फुर्ती से पुतले गिराएगा !
लिख लो !
समय और नियती एक दिन प्रतिशोध तो जरूर लेती ही है !
समय गद्दार राष्ट्रद्रोहीयों को कभी भी क्षमा नहीं करेगा !
ये तो होकर ही रहेगा !
क्योंकी स्वयं ईश्वर ही सत्य की अंतिम जीत तो करके ही रहता है !
नौटंकी बाज सत्य का चाहे कितना भी मुखौटा लगा ले , उनका असली चेहरा तो एक दिन सामने आता ही है !
और यह समय भी अब दूर नहीं है !
*सत्यमेव जयते !!*
*जयतु हिंदुराष्ट्र !!*
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